इं धरती के बांट-बांट मा, भात-भात की कला मिलै
आव भैया मीठी मनवारा, मनखा इहाँ के भला मिलै
डोंगर-टीला, नदिया-झिरिया, जंगल अउ सतपुड़ा देखौ
सतपुड़ा के रंग घना रे, आंख खोल के सावन देखौ
धिन रंग-रूढ़ी धरती मइया, सतपुड़ा मइया न्यारी
आव भैया अपने देस मा, लागै सबला प्यारी
तोर मान बढ़ावन खातिर, दिल से द्वार खोल देन
आव भैया सतपुड़ा मा, मया की धार बोल देन
म्हारी धरती वीरन की, गाथा पुरखन की भारी
जंगल, नदिया, पहाड़ बचावन, यही रीत हमरी सारी
तापी मइया, सतपुड़ा धरती, असीस सबपे डालै
म्हारो सतपुड़ा देस निराला, सुख-शांति घर-घर पालै
🙏 सतपुड़ा की माटी को नमन 🙏
✍️ राजेश बारंगे पंवार
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