आपने यह कैसे जाना कि मैं महान राजा बनूंगा ?
ज्योतिषी ने उत्तर दिया -
तुम्हारे सामने के टेढे-मेढ़े दो दांतों को देखकर मैने यह भविष्यवाणी की हैं।
तुमने अपने ये दांत तोड़ क्यों डाले ?
बालक ने उत्तर दिया -
गुरूदेव ! मैं अपने टेढ़े-मेढ़े दांतों के कारण या भाग्य के भरोसे राजा नहीं बनना चाहता । मैं अपनी शक्ति और पराक्रम से ही राजा बनूंगा। भाग्य से मिलने वाला राज्य मुझे नहीं चाहिए।
कालिदास जैसे क ई कवि और विव्दान उनकी सभा में रहते थे। वे प्रज्ञा का बहुत ध्यान रखते थे और अत्यंत लोकप्रिय भी थे। विक्रमादित्य के बाद राजाभोज ही ऐसे शासक हुए हैं , जिनकी अनेक रोचक काहनियॉ उस समय के लोगों के बीच प्रचलित थी और आज भी प्रचलित हैं। इन कहानियों में राजाभोज की विव्दता , समझदारी , न्याय की भावना , उदारता और प्रजा के प्रति प्रेम की भावना देखने को मिलती हैं। ऐसी ही कुछ रोचक कथाएं यहां दी जा रही हैं।