क्षत्रिय पवार , जिसे पंवार, पवार या भोयर-पवार भी कहा जाता है, एक राजपुत वंश की शाखा है। हिंदू और वैदिक वर्ण व्यवस्था के अनुसार, वे क्षत्रिय वर्ण से हैं [1] [2]। भोयर-पवार मालवा के पंवार राजपूतों के वंशज होने का दावा करते हैं [3] [4]।
१५वी से १७वी शताब्दी के बीच, पंवारो की ७२ कुल शाखा का प्रदेशांतर मालवा से होते हुए सतपुड़ा और विदर्भ के क्षेत्रों में हुआ। वे वर्तमान में मुख्य रूप से मध्य भारत के बैतूल, छिंदवाड़ा और वर्धा क्षेत्रों में केंद्रित हैं।
बैतूल, छिंदवाड़ा और वर्धा के क्षेत्रों को स्थानीय रूप से भोयर-पट्टी कहा जाता है, इसलिए यहां रहने वाले पवारों को भोयर-पवार के नाम से जाना जाता है[5]। यह पवार आज भी राजपूताना की मालवी बोली का भ्रष्ट रूप बोलते हैं, जिसे उनके नाम पर भोयरी कहा जाता है [6]।
पंवारो के उपनाम
- पवार (७२ कुल) :
1. गिरहारे/गिरारे
2. पराड़कर/ परिहार/
3. खरपुसे, (केवल छिंदवाड़ा)
4. बड़नगरे/ नागरे/ बन्नागरे
5. घाघरे,
6. छेरके, शेरके (छिंदवाड़ा)
7. कडवे
8. पाठे, पाठा / पाठेकर
9. डोंगरदिये/ डोंगरे
10. धारफोड/ धारपूरे
11. चौधरी,
12. माटे/माटेकर
13. फरकाड़े
14. गाडगे
15. ढोटे/धोटे
16. देशमुख,
17. खौसी/खावसी/कौशिक/खवसी/खवसे
18. डिगरसे/दिगरसे/ दिग्रसे
19. भादे/भादेकर
20. बारंगा/ बारंगे
21. राऊत,
22. काटोले/गघड़े/गद्रे
23. दुखी/दूर्वे
24. किंकर/किनकर
25. रबडे,
26. कसाई/कसलीकर,
27. मनमाडे/मानमुडे
28. सवाई,
29. गोरे,
30. डाला/डहारे
31. उकार/ओमकार
32. उघडे,
33. करदाते/दाते
34. करंजकर/किरंजकर
35. कामडी,
36. कालभूत/कालभोर,
37. कोडले/कोरडे
38. हिंगवे /हिंगवा
39. खपरिये/ खपरे,
40. गाडरे,
41. गाकरे/गाखरे
42. गोहिते/गोहते
43. चिकाने,
44. चोपडे,
45. टोपलें,
46. ढोले,
47. ढोबले/ढोबारे
48. डंढारे,
49. देवासे,
50. ढोंडी
51. नाडीतोड,
52. पठाडे,
53. पिंजारे/ पिंजरकर
54. बरखाडे,
55. बिरगाडे,
56. बारबोहरे,
57. गोंनदिया
58. बैगने,
59. बोबडे,
60. भोभटकर
61. बुवाड़े/बोवाड़े
62. ठवरी
63. मुने/मुन्ने
64. रमधम
65. ठुस्सी
66. रोडले
67. लबाड,
68. लाडके,
69. लोखंडे,
70. सवाई,
71. सरोदे
72. हजारे
other
73. Bisen (in Chhindwada)
- कुछ लोग अपने उपनाम की जगह पंवार या पवार भी लगााते है।
( पंवारो के यह ७२ उपनाम राजपूत सैनिक सरदारों के नाम/पदनाम/पदवी/संकेतित नाम है )




